Rajeev kumar

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लेखनी कहानी -18-Sep-2022

सोच 

सोच समंदर 
गहरा भी 
सिमटा हुआ भी .

सोच समंदर 
उफनती लहरें 
किनारा है दूर .

सोच समंदर 
डुबाये उबारे 
गतिमान करे .

सोच समंदर 
समय का पहिया , छोड़ा
आदमी यहीं है डूबा .

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6 Comments

बहुत ही सुंदर सृजन

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Achha likha hai

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Gunjan Kamal

19-Sep-2022 06:46 PM

बहुत खूब

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